एलोवेरा के फायदे, उपयोग और नुकसान

एलोवरा का नाम हम सभी ने सुना है इसके गुण से भी वाकिफ है, आज के समय मे एलोवेरा का पौधा आपको हर भारतीय घर मे आपको देखने के लिए मिल जायेगा क्योकि हर कोई अपने त्वचा और अपना फेस को लेकर स्ट्रैस्ड रहते है और उन्हे एलवोरा ही सबसे सस्ता और बेहतर उपाय माना जाता है। एलोवेरा का पौधा अपने अंदर कई प्रकार के गुणो को छुपाकर रहता है और इसके इन्ही गुणो के वजह से एलोवेरा का पौधा आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है और इसके इस्तेमाल भी बहुत ही लाभदायक साबित होते है। हम सभी जानते है कि एलोवेरा का इस्तेमाल त्वचा के लिए बहुत ही बेहतर मानी जाती है और हमारे त्वचा के लिए एलोवेरा लाभदायक भी है।

आज इस आर्टिकल मे आप जानेंगे एलोवेरा कितने प्रकार के होते है, एलोवेरा मे पाये जाने वाले औषधिय गुण, एलोवेरा के फायदे और एलोवेरा को उपयोग करने का तरीका

एलोवेरा कितने प्रकार के होते है

अगर विज्ञान कि माने तो एलोवेरा कई अलग-अलग तरह के होते है और सभी के बरे मे बताना मुमकिन नही है, इसलिए हमने 5 अलग-अलग तरह के एलोवेरा के प्रकार को चुना है। जो कुछ इस प्रकार से है,

  1. एलो बरबडेंसिस (Aloe Barbadensis) – ऐसा कहा जाता है कि ये एलोवेरा का सबसे आम प्रकार है, कहने का मतलब है कि ये प्रजाति हमे आराम से देखने को मिल जाते है और इसे किसी भी प्रकार के परिचय की जरूरत नही है साथ मे ये एलोवेरा अपने औषधीय गुणों के लिए भी काफी जाना जाता है।
  2. टाइगर एलो – जैसा कि हम सभी जानते है कि प्राकृतिक का दिया हुआ हरेक चिज अनमोल और बेहद ही मनमोहक है, इस तरह के एलोवेरा की सबसे खूबसूरत प्रजातियों मे से एक माना जाता है। जिसे एक छोटे से गमले या कंटेनर मे रखा जा सकता है, कहने का मतलब है कि इसे एक छोटे गमले मे भी इस पौधे को रखा जा सकता है और इसके लिए हमे घर कोई बहुत बडी जगह या बागीचा नही चाहिए। अगर आप इसे पहचानना चाहते है तो इसे इसके तलवार के आकार की पत्तियां से पहचान सकते हो और साथ मे जिसपर चितकबरे धब्बे होते है।
  3. क्लाइम्बिंग एलो – ऐसा कहा जाता है कि इस प्रकार के एलोवरा, एलोवेरा की दुर्लभ प्रजातियों मे से एक माना जाता है और इसकी पत्तियां आस-पास के पेड़-पौधों मे फैल सकती है। जैसा कि आपको समझ मे आ ही गया होगा कि ये काफी दुर्लभ प्रजातीयों मे से एक है और इसको पाना भी मुश्किल है।
  4. एलो डेस्कइंगसी (Aloe Descoingsii) – ऐसा कहा जाता है कि ये एलोवेरा का सबसे छोटी प्रजाति होती है और यह महज 2-3 इंच तक ही बढ़ती है। गहरे हरे रंग की पत्तियों पर सफेद-सफेद धब्बे होते है और वसंत से गर्मियों के दौरान इस पर पीले-नारंगी रंग के फूल खिलते है।
  5. रेड एलो – ऐसा कहा जाता है कि इस तरह एलोवेरा मे विकास बहुत ही धीमी गति से बढ़ती है और रेड एलो को पानी की आवश्यकता भी कम होती है। सूरज की किरणें पड़ते ही यह खूबसूरत लाल तांबे के रंग सा दिखता है और यह एलोवेरा के सबसे आकर्षक किस्मों मे से भी एक है।

एलोवरा के फायदे

  1. वजन कम करने मे मददगार

आज के समय मे हर दूसरा व्यक्ति अपने वजन के वजह से या फिर अपने मोटापा से परेशान है, किसी को अपना वजन बोझ लगता है किसी को अपना मोटापा एक कर्ज कि तरह। नाही बिना मेहनत किये मोटापा जाती है और नाही लोग मेहनत करना चाहते है। आज के समय मे लोगो के लिए सबसे बडा काम है फिट रहना लेकिन लोगो को सिर्फ इस बात कि समझ है कि फिट रहना चाहिए। ऐसे मे अगर किसी को अपना वजन कम करना है तो आपके लिए एलोवेरा एक वरदान के तौर पर है, एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) के बेवसाइट पर प्रकाशित एक शोध कि माने तो चुहों पर किये गये शोध से पता चला है कि एलोवेरा में मौजूद एंटी-ओबेसिटी गुण की वजह से डाइट के कारण होने वाली मोटापे की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है।

  1. कब्ज मे फायदेमंद

आज के समय मे हम से कई लोग सही से खाना नही खाते है या पिर किसी कारण से सही समय पर नही खा पाते है लेकिन ये हमे बाद दिक्कत देति है जब हमारा खाना सही तरीके से नही पचता है और हमे कब्ज जैसी दिक्कतों को झेलना पडता है। ऐसे मे एलोवेरा का सेवन आपके लिए कारागर साबित हो सकती है, कब्ज मे एलोवेरा का रस पेट के लिए बेहतर माना जाता है क्योकि इसमे पाये जाने वाले लैक्सेटिव गुण पेट को साफ रखने मे हमारी मदद करता है।

  1. मधुमेह के लिए फायदेमंद

आज के समय मे शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो मधुमेह जैसे रोग से ग्रसीत ना हो, आज के समय का हर दूसरा बुजुर्ग मधुमेह रोग से ग्रसीत होगा और इस रोग से ग्रसीत होने के बाद इंसान के खान-पान पर रोक लगा दिया जाता है। ऐसे मे मधुमेह से ग्रसीत व्यक्ति के लिए एलोवेरा का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है, एलोवेरा मे पाये जाने वाले एंटी-डायबिटिक जैसे गुण मधुमेह को कम करने मे मददगार साबित होते है।   इसके अलावा, डायबिटिक चूहों पर किए गए शोध मे पाया गया कि एलोवेरा की पत्तियां भी मधुमेह मे असरदार साबित हो सकती है।

  1. पाचन क्रिया मे मददगार

एलोवेरा मे पेट और पाचन संबंधी दिक्कत से निजात का गुण है, इसमे पाये जाने वाले एंटी-अल्सर गुण पेट मे बनने वाले बनने वाले बैक्टीरिया से लडती है, वो बैक्टीरिया जो पेट और पाचन तंत्र के लिए खराब माना जाता है। पाचन संबंधी विकार के लिए एलोवेरा का जूस सबसे बेहतर माना जाता है।

  1. कोलेस्ट्रॉल के लिए एलोवेरा के गुण

एलोवेरा का सेवन कोलेस्ट्रॉल के लिए मददगार साबित हो सकता है, एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) के बेवसाइट पर प्रकाशित एक शोध कि माने तो एलोवेरा के सेवन से न सिर्फ ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम हो सकता है, बल्कि लिवर कोलेस्ट्रॉल भी कम हो सकता है और इसके अलावा एलोवेरा मे मौजूद हाइपोकोलेस्ट्रोमिक प्रभाव कोलेस्ट्रॉल को कम करने मे मददगार हो सकता है।

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