दालचीनी से होने वाले फायदे, उपयोग और नुकसान

भारतीय बाजार मे हर भारतीय घर के रसोई मे दालचीनी जरुर मिलेगा, दालचीनी एक ऐसा मसाला है जो हर खाने मे इस्तेमाल किया जाता है। दालचीनी ना सिर्फ खाने को स्वदाष्टि बनाता है बल्कि ये एक आर्युवेद औषधि भी है, आर्युवेद को एक औषधि के तरह इस्तेमाल किया जाता है। Daalchini सदियो से ही आर्युवेद मे अहम भुमिका निभाते रहा है और एक अरसे ये भारतीय खानो मे इस्तेमाल होता आया है, इसका सेवन कई तरह के रोगो से लोगो को बचाता है और उनके बेहतर स्वास्थय के लिए फायदेमंद रहा है। Daalchini हमारे शरीर को रोगमुक्त रखता है और रोगो से लडने लायक शरीर को बनाता है।

आज के इस हेल्थ टिप मे जानेंगे दालचीनी के बारे मे कि दालचीनी के कितने प्रकार होते है, फायदे, दालचीनी मे पाये जाने वाले पौष्टिक तत्व, उपयोग और  नुकसान।

दालचीनी कितने प्रकार की होती है

सबसे पहले आपको बता दें कि Daalchini को अंग्रेजी मे इसे Cinnamon कहते है और दालचीनी 4 प्रकार के होते है।

  • ट्रू दालचीनी या सीलोन दालचीनी या फिर मैक्सिकन दालचीनी (Cinnamomum Zeylanicum)
  • इंडोनेशियन दालचीनी (Cinnamomum Burmanni)
  • वियतनामिज दालचीनी (Cinnamomum Loureiroi)
  • कैसिया दालचीनी या चाइनीज दालचीनी (Cinnamomum Aromaticum)

सीलोन दालचीनी (Ceylon cinnamon) को सबसे बेहतर Daalchini मानी जाती है लेकिन ये महंगी होने के बावजूद लोग इस दालचीनी को खरीदना पसंद करते है क्योकि इसके स्वाद और गुण और सभी से ज्यादा बेहतर और बेहतर स्वाद होता है।

दालचीनी के फायदे

जैसा कि हमने आपको उपर पहले ही बता दिया है कि Daalchini सिर्फ स्वाद के लिए इस्तेमाल नही करते है, दालचीनी एक आर्युवेदिक औषधि भी है और औषधि होने कारण इसके कई सारे फायदे है शरीर के लिए बेहतर माना जाता है। जिसके बारे मे हम विस्तार से जानेंगे।

  1. एंटी-ऑक्सीडेंट

दालचीनी मे एंटी-ऑक्सीडेंट्स जैसे गुण होते है पाये जाते है जो हमारे शरीर को के लिए बेहतर होता है और रोगो से लडने के लिए फायदेमंद होता है। एक अध्ययन से पता चला है कि 26 अलग के मसालो मे एंटी-ऑक्सीडेंट्स कि गतिविधी Daalchini मे बेहतर है।

  1. एंटी-इंफ्लामेटरी

अध्ययनो से पता चला है कि Daalchini मे एंटी-इंफ्लामेटरी कुछ मात्रा मे पायी जाती है और कई शोध से पता भी चला है कि Daalchini और इससे बनने वाले तेल मे एंटी-इंफ्लामेटरी कि मात्रा होती है और ये अपना प्रभाव भी दिखाता है। शोध के अनुसार इसमे कई फ्लेवोनोइड यौगिक बोते है जिससे एंटी-इंफ्लामेटरी कि गतिविधी का पता चलता है। इससे इस बात का निष्कर्ष निकलता है कि दालचीनी मे एंटी-इंफ्लामेटरी गुण भी होते है।

  1. डायबिटीज और ब्लड शुगर

जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके है कि दालचीनी कई तरीके से शरीर को रोग से बचाता है, उनमे से दो है डायबिटीज और ब्लड शुगर कि बिमारी। एक शोध से पता चला है कि Daalchini मे पाये जाने वाले गुण पॉलीफेनॉल्स सीरम, ग्लुकोज और इंसुलिन को कम करके डायबिटीज जैसे खतरो से बचाता है। डायबिटीज से ग्रसीत व्यक्ति को अपने आहार के साथ रोजाना सेवन करना चाहिए।

  1. हृदय स्वास्थ्य

Daalchini हमारे शरीर मे हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम करने मे मदद करता है कि ताकी हमारा ह्रदय स्वस्थ रहे, एनसीबीआई के शोध से पता चला है कि 1,3 और 6 ग्राम Daalchini का सेवन करने से शरीर मे एलडीएल, सीरम ग्लुकोज, ट्राइग्लिसराइड जैसे गुण कोलेस्ट्रॉल संबंधी जैसी दिक्कतो से दुर रखते है और ह्रदय को स्वस्थ रखते है।

  1. कैंसर

Daalchini एक आर्युवेदिक औषधि है तो कैंसर मे भी कारागर साबित होगी ऐ हम नही शोध कहती है। एक शोध से पता चला है कि इसमे कैंसर को कोशिकाओं को कम करने कि क्षमता होती है और दालचीनी त्वचा के कैंसर के खिलाफ काफी कारगर साबित होती है और सुरक्षा भी प्रदान करती है। Daalchini कैंसर के कोशिकाओं को शरीर के विकसीत होने से रोकती है और फैलने से भी रोकती है।

  1. पेट और पाचन

दालचीनी मे पेट और पाचन संबंधी दिक्कत से निजात का गुण है, इसमे पाये जाने वाले एंटी-माइक्रोबियल गुण पेट मे बनने वाले बनने वाले बैक्टीरिया से लडती है, वो बैक्टीरिया जो पेट और पाचन तंत्र के लिए खराब माना जाता है। प्राचिन काल से Daalchini पेट संबंधी विकारो के लिए आर्युवेदिक औषधि के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

  1. मस्तिष्क स्वास्थ्य

साल 2016 मे प्रकाशित न्यूरोइम्यून फार्माकोलॉजी जर्नल मे इस बात को बतायाय गया है कि चुहो पर किये गये शोध के मुताबिक इस बात का पता चला है कि दालचीनी का सेवन करने से याददाश्त को बढाया जा सकता है। इसमे पाये जाने वाले ऑक्सीडेटिव मतिष्क के स्ट्रेस को कम करने मे मदद करता है, जिससे मतिष्क बेहतर और स्वस्थ रहता है। Daalchini के सेवन से जल्दी सिखने कि प्रवृत्ति को भी बढोतरी मिलती है, शोध कि माने तो ऐसा Daalchini मे पाये जाने वाले गुण सोडियम बेंजोएट के वजह से होता है।

  1. ओरल हेल्थ

अध्ययन से पता चला है कि दालचीनी से निकलने वाले तेल मे स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स नामक बैक्टीरिया को कम करने मे मददगार साबित होता है और ये बैक्टीरिया हमारे दांतो मे कैविटी के लिए जिम्मेदार है। हांलाकी आपके बता दें कि Daalchini का ज्यादा इस्तेमाल दांतो के लिए होनीकारक हो जाता है।

  1. फंगल इंफेक्शन

Daalchini मे एंटी-फंगल गुण पाये जाते है जो फंगल इंफेक्शन से शरीर को दुर रखता है और फंगल संक्रमण से शरीर को बचाने का काम भी करता है। दालचीनी के तेल में पाया जाना वाला एंटी-फंगल प्रभाव कैंडिडा अल्बिकन्स, कैंडिडा ट्रॉपिकल और कैंडिडा क्रूसि जैसी दिक्कतो से लड़ने में मदद करता है।

दालचीनी के पौष्टिक तत्व

जैसा कि अभी तक आपने Daalchini के फायदे के बारे मे अब जानते है, दालचीनी मे पाये जाने ले पौष्टीक तत्व के बारे मे

  • पानी
  • उर्जा
  • प्रोटीन
  • वसा
  • कार्बोङाइड्रेट
  • शुगर
  • कैल्शीयम
  • आयरन
  • मैग्नीशीयम
  • फास्फोरस
  • सोडियम
  • पोटैशियम
  • जिंक
  • मैंगनीज
  • कॉपर
  • सिलेनियम
  • विटामिन-सी
  • थियामिन

दालचीनी का उपयोग

हर किसी के लिए इस बात क जानना जरुरी है क्योकि अगर आ इसका गलत इस्तेमाल या फिर गलत सेवन करते है तो पके लिए नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए हम आपको निचे पुर्ण विवरण के साथ बतायेंगे दालचीनी के इस्तेमाल के बारे मे।

दालचीनी कैसे खाएं

  • जैसा  कि हम सभी जानते हा कि Daalchini के मासाल और इसका का इस्तेमाल खाने मे मसाले की तरह करना चाहीए।
  • अगर आपको सर्दि-जुखाम जैसी दिक्कत है तो सिनेमन पाउडर का सेवन दूध के साथ कर सकते है।
  • इसे गुनगुने पानी मे मिलाकर भी सेवन कर सकते है।
  • Daalchini को शहद के साथ मिलाकर चेहरे पर लगा सकते है ताकी चेहरा ग्लो करे।
  • Daalchini का इस्तेमाल हर्बल टी या काढ़ा बनाते समय भी कर सकते हैं।
  • दालचीनी को उबालकर इसके पानी से बालों को धोया जा सकता है, ऐसा करने से बाल मुलायम हो जाता है।
  • यहां तक की च्यवनप्राश बनाने के लिए भी Daalchini का उपयोग किया जाता है।

कितना खाएं

जैसा कि आप सभी जानते हरेक पदार्थ का फायदा और नुकसान दोनो होता है लेकिन किसी भी एक निर्धारित मात्रा मे लिया जाये तो ठीक है किसी भी चिज को अधिक मात्रा मे किया जाये तो वो नुकसान ही देता है, ऐसा ही दालचीनी के साथ भी है। आपका प्रतिदिन सेवन 0.1 mg/kg से ज्यादा नही होना चाहिए।

दालचीनी के नुकसान

उपर आपने पढ ही लिया होगा कि एक निर्धारित मात्रा मे Daalchini का सेवन तो सही ही माना जायेगा लेकिन मात्रा बडने से दिक्कतें भी बढ सकती है और दिक्कत का मतलब होता है नुकसान।

  • दालचीनी मे पाये जाने वाला एसिडिक नेचर की वजह से दांत प्रभावित हो सकते है, जो दांतो के लिए बेहद ही खराब माने जाते है।
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पेट संबंधी) दिक्कत
  • एलर्जी भी बढ सकती है।
  • लिवर संबंधी समस्या।
  • ग्लूकोज का स्तर कम हो जाता है जिससे व्यक्ति अपने शरीर मे ऊर्जाहीन महसूस करता है और मनुष्य किसी काम को नही कर पाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *