डिप्रेशन से कैसे निकले | Depression kya Hai

कहने के लिए तनाव एक शब्द है लेकिन इसका प्रभाव इंसान को मौत से मिला देता है, डिप्रेशन जो किसी भी व्यक्ति के द्वारा खुद मे उपजाया गया एक दर्द। अक्सर लोग किसी भी वजह से अपनी जींदगी मे किसी भी चिज को त्याग कर देते है, जैसे मे किसी ने अपने रिश्ते के लिए अपने सपनो को त्याग दिया या किसी ने अपने सपने के लिए अपने रिश्तो को त्याग दिया और ऐसे कई वजह हो सकते है।

त्याग करने के बाद अक्सर लोगो मे एक मलाल रहने लग जाती है, जिससे व्यक्ति खुद काफी असंतुष्ट-सा रहता है और किसी भी चिज मे रुचि लेना छोड देता है। कई बार लोगो के लिए तनाव कि वजह आर्थिक स्थिति भी रहती है, लोग थक जाते है गरीबी मे रहकर या फिर किसी पर जींदगी से कर्ज हो जाता है और ऐसे कई कारण हो सकते है। इन सब के बाद इंसान इन सभी चिजो के बारे मे सोचकर जैसे मानो अंदर से टुटने लगता है, उसकी जींदगी मे डिप्रेशन कहीं ना कहीं घर कर चुकि होती है और उसके जींदगी के हंसने वाले पल भी जैसे मायुसी लेकर आती है।

जैसा कि हमने आपको उपर भी बताया कि कहने के लिए तनाव एक शब्द है लेकिन इसका प्रभाव इंसान को मौत से मिला देता है, बात भी सही है क्योकि डिप्रेशन पुर्ण जींदगी इंसन अंदर से खत्म करती जाती है। मानो इंसान जैसे चाहता हो किसी भी तरह से उसकी मौत हो जाये या फिर किसी तरह से वो मर जाये और लोगो के इसी सोच के वजह से तनाव लोगो के लिए एक बीमारी बन चुकी। एक ऐसी बीमारी जो इंसान खुद के अंदर खुद ही पालता है और खुद हो मौत के मुंह मे धकेलता है, सबसे पहले लोगो को इस बात कि जानकारी होनी जरुरी है मौत अंत नही है। अगर किसी को लगता है उसके मर जाने से सबकुछ ठीक हो जायेगा तो शायद वो व्यक्ति गलत है क्योकि महाभारत जैसे महाकव्य मे भी बताया गया है मौत अंत नही है। बढते समय के साथ लोगो मे तनाव के बीमारी भी बढती जा रही है, WHO कि माने तो पिछले दशक मे डिप्रेशन से ग्रसीत 18% लोगो है और उनमे से भी 25% भरातीय बच्चे है।

डिप्रेशन – तनाव के लक्षण

depression symptoms

तनाव मे लोगो के कुछ आम लक्षण है जो अक्सर लोगो मे आसानी से देखा जा सकता है, अगर कोई तनाव से गुजर रहा हो तो

  • ठीक से नींद न आना-

डिप्रेशन मे लोगो बिस्तर पर पडे तो रहते है लेकिन अलग ही दुनिया बसाकर, वो कुछ सोच रहे होते है और उन्हे नींद भी आसानी से नही आती है।

  • कम भूख लगना-

जैसी कि हमने आपको पहले ही बताया कि इन्हे किसी भी रुचि नही होती है, काम क तो लेंगे लेकिन मन से नही करेंगे।

  • हर समय उदास रहना-

जैसा कि हमने आपको बताया कि इनके लक्षण आम होते है और वो पता चल जाता है, उदासी इनके चेहरे पर साफ तौर पर देखा जा सकता था।

  • आत्मविश्वास में कमी-

थकान महसूस होना और सुस्ती- ये किसी भी काम मानसिक तौर पर कभी भी तैयार नही रहते है और इन्हे खुद मे ही कमजोरी हो जाती है क्योकि कहते है कि हार तब होती है जब मान लिया जाता है और ये पहले से भी मानसिक तौर पर हार चुके होते है।

उत्तेजना या शारीरिक व्यग्रता

depression symptoms

  • मादक पदार्थों का सेवन करना-

ऐसे मे लोगो को पहला और सबसे बेहतर उपाय नशा लगता है और नशा भी करने लगते है क्योकि नशा करने के बाद आप कुछ सोचने और समझने के लायक नही होते है और लोगो को ऐसे जीने कि आदत लग जाती है।

  • एकाग्रता में कमी-

जब इंसान किसी चिज को सोचने और समझने के लायक नही होता है तो एकाग्रता उसके बश कि बात ही नही है।

  • ख़ुदकुशी करने का ख़्याल-

जैसा कि हमने आपको उपर पहले भी बताया कि इंसान कि मानो जीने इच्छा ही खत्म हो जाती है और वो हर वक्त मर जाने के बारे मे ही सोचता है।

  • किसी काम में दिलचस्पी न लेना-

जिसके जींदगी का लक्ष्य ही हो गया हो मरना वो किसी भी काम रुचि क्यो ही लेगा।

अब जब दिक्कत अंदरुनी है तो इलाज भी कुछ हट कर होना चाहिए

  1. अपने दोस्तो से या फिर किसी अपने से बात करें- जब लोग तनावपुर्ण गुजर रहे होते है तो उन्हे अकेलेपन अच्छा लगता है और ये उनके लिए खराबी कर जाती है क्योकि अक्सर ऐसे वक्त पर इंसान अकेले रहकर मौत जैसी बाते सोचता है। इससे अच्छा है कि आप अपने किसी से दोस्त से मिलें और उससे ज्यादा से ज्यादा बात करें य़ा फिर अपने परिवार के साथ समय बितायें और हो सके तो ज्यादा से ज्यादा समय बितायें।
  2. सेहतमंद खायें और रोजाना व्यायाम करें- स्वस्थ रहना ही जींदगी कि चाभी मानी जाती है और ऐसा करने से आपके अंदर सकारात्मक उर्जा बढेगी और आप जींदगी को लेकर काफी उत्साहीत होगें।
  3. नियमित रुप से छुट्टीयां लें- इंसान काम करके थक जाता है और ये बात हम सभी जानते है, ऐसे मे समय-समय पर छुट्टीयां लेकर आराम करें या फिर कहीं घुमने निकल जायें।
  4. नींद पुरी करें- जैसा कि हम सभी जानते है कि विज्ञान भी कहता है कि हरेक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए कम से कम 8 घंटे कि नींद पुरी करनी चाहिए और ये इंसान के स्वस्थ रहने का राज है साथ मे ये तब जरुरी हो जाता है जब तनाव भरी जींदगी कि बात आती है।
  5. गाना सुनें- हम सभी जानते है और साथ मे पुरी दुनिया मानती है कि म्युजिक मे इंसान को कई बीमारी से ठीक करने तक की भी ताकत है, ऐसे मे डिप्रेशन भरी जींदगी मे गाना काफी कुच बदल सकता है और आपको जींदगी के दौड मे वापस भी ला सकता है।

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